Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

चलो वहाँ

चलो वहाँ

1 min 267 1 min 267

चलो वहाँ

जहां नवीन दुनिया हो 

जहां के लोग घूम रहे हों

पूर्णता के असीमित धरातल पर

और ढूंढ रहे हों

जाने में या अनजाने में 

यहां के जैसी त्रासदी की दुनिया। 


चलो वहाँ

जहां ऊंची इमारतें नहीं

जहां हो छोटी सी कुटिया

और न हो उसमें ऐसी जैसी मशीनें 

जिसमें निकलती है नम और सांद्र 

वायु 

उसमे हो एक छोटा सा सा झरोखा

और उस झरोखे से आती हो

पूर्वा की बयारें। 


चलो वहाँ

जहां न सुनाई दे 

महानगरों की न थमने वाली

आवाजें 

जहां सुनाई दे 

सुनसान रातों में

पेड़ से ओस की टपकने की 

आवाजें 

कोयल की आवाजें, मोर की

आवाजें 

और पंछियों के शोर 


चलो वहां

जहां के लोग बेईमान न हों

जहां के लोग न चाहते हो

हड़प लेना पूरी दुनिया को

जहां के लोग चाहते हों

बांटकर खाना, मिल कर रहना

एक दूसरे से, एक दूसरे से 


चलो वहां

जहां मनुष्य रहते हों

जहां रहकर शायद 

हम भी मनुष्य बन जाएं।


Rate this content
Log in