STORYMIRROR

अनुभूति गुप्ता

Children Stories Inspirational

4  

अनुभूति गुप्ता

Children Stories Inspirational

चलो खोज लाए

चलो खोज लाए

1 min
418

चलो खोज लाए थोड़ा सा प्रकाश

मुट्ठी भर आकाश

चूम लूँ गगन को 

मिल आऊँ सज़न को

कटते पेड़ों की वेदना पढ़ लूँ

अपने हृदय में सारा दर्द भर लूँ

मैं परिंदा इस गगन का

कैसे इंसान का गुनाह माफ कर दूँ

मेरे हिस्से न कुछ बचा है

ईश्वर ने कितना कुछ रचा है

मेरे पंखों में

आया बस खंडहर है

पलकों पर उतरा बवंडर है

पेड़ कटते जा रहे हैं

घोंसले उजड़े जा रहे हैं

तुम ही बताओ

कहाँ घर बनाऊँ

क्या खंडहर में बस जाऊँ..?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन