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Hitendra Chandurkar

Others

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Hitendra Chandurkar

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छोड़ दिया

छोड़ दिया

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दुनिया को शौक अपने, बताना छोड़ दिया

बातों को अपनी दोहराना छोड़ दिया,


रात के अंधेरे मैं प्रकाश की ख़ातिर,

चाँद ने सूरज से याराना छोड़ दिया,


प्रथ्वी पर कुछ तो कमी थी,

तभी तो ख़ुदा ने नगीना छोड़ दिया,


उसकी आँखों मैं छुपी हया को देख,

मैने बेशर्मी से मुस्कुराना छोड़ दिया,


जिंदगी का मतलब जब जाना हमने,

पल पल में यूँ मर जाना छोड़ दिया,


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