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Sandhya Chaturvedi

Others

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Sandhya Chaturvedi

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बरगद की छांव ही था

बरगद की छांव ही था

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पापा,

आप का साथ

जैसे सर पर मेरे

ईश्वर का हाथ

बरगद जैसी विशाल

आप की छत्र छाया में

दुख की धूप ने कभी

मुझ को छुआ ही नहीं था।


समाज की धूल से दूर,

आप के प्यार की

शीतल बयार।


हमेशा मन को

महकाये रखती थी।

जैसे पंक्षी अपना

आशियाना खोने पर

चहकना भूल जाते हैं।


ठीक वैसे ही मैं

भी चहकना भूल

ही गयी हूँ

तकलीफ की गर्मी

भी आप की

छांव में सुकून

की ठंडक देती थी।


आप की बाहों में जीवन

की हर शाम सुहानी

और रातें सुकून से

गहरी नींद में होती थी।

आपका प्यार

बरगद की विशाल

छांव से ही तो था।


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