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एस डी जोशी

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एस डी जोशी

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भाव

भाव

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सूरज न सही दीया भी बहुत है रोशनी के लिए

आभास सूरज का होगा।

सागर न सही बूँद ही बहुत है

पानी के लिए

गागर में समाहित सागर होगा।

पर्वत न सही टीले ही बहुत हैं

चढ़ाइयों के लिये

अन्दाज पर्वतों का होगा।

जोड़ की चार लाइनें ही बहुत हैं

कविता साहित्य के लिये

प्रस्तुति का भाव महाकाव्य सा होगा।


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