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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

Children Stories

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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

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✍️ बादल ✍️-( 44 )

✍️ बादल ✍️-( 44 )

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उमड़ घुमड़ कर बादल छाए, 

लो बारिश का मौसम आया, 

प्यासी धरती ने अपनी प्यास बुझाई, 

चारों ओर हरियाली हरियाली छाई, 


कोयल बोले बिजली कड़के, 

गरज गरज के बादल बरसे, 

ताल तलैया सब भर जाए, 

किसानों का मन-हर्षाय, 


चारों ओर खुशहाली छाई, 

उमड़-घुमड़ कर बादल छाए, 

लो बारिश का मौसम आया, 

कहीं बाढ़ तो-कहीं सुखा छायां, 


बारिश ने अपना कहर बताया, 

किसी को हँसाया-किसी को रुलाया, 

बारिश ने अपना सबको प्रकोप दिखाया, 

कहीं धूप तो कहीं छाँव 


अजब की तेरी माया, 

उमड़-घुमड़ कर बादल छाए,

लो बारिश का मौसम आया !


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