STORYMIRROR

Aarti Sahu

Others

3  

Aarti Sahu

Others

बाबरी मस्जिद फैसला |

बाबरी मस्जिद फैसला |

1 min
223

मंदिर बने या मस्जिद

तुम अपने घर मत तोड़ना।


फैसला चाहे जो भी हो

अपनी इंसानियत ना छोड़ना।


अगर कण-कण में है भगवान 

तो मस्जिद के इटों में भी होगा उसका वापस,

मंदिर में भी होगा अल्लाह का एहसास।


फैसला चाहे जो भी हो, इस बात पर गौर करना 

कोई ना हिन्दू होता है, ना मुसलमान होता है

हम सब के भीतर बस एक इंसान होता है।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन