अर्थ
अर्थ
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कोई बेतुकी बात कह दो अभी,
अपने दिल का हाल कह दो अभी,
क्यों ज़रूरी है शब्दों को संजोना,
क्यों ज़रूरी है अक्षरों को पिरोना,
कह दो जो भी कहना है,
तुम को तो बस बहना है।
कह दो मन की लहज पहज को,
कह दो मन की कमन मनक को,
सुने सुने ये शब्द नहीं हैं,
शब्दकोष में अर्थ नहीं हैं।
फिर भी,
कह दो हनख को हौले से,
कह दो जीरफ को हौले से,
जो जानेगा हनख क्या होती है,
वो समझेगा तुम्हारी जीरफ को।
आओ थोड़ा और आगे बढ़ें,
भूल भाषा के नियमों को,
बिना अर्थ के शब्दों से,
कुछ बेमतलब की बात करें,
उगता सूरज जिसमें हो,
हम ऐसी एक रात करें।
करें कुछ तो बिना मतलब के,
भले ही एक बात सही,
एक भी इन्सान ना हो जिसका,
एेसी भी एक जात सही।
