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अशोक वाजपेयी

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अशोक वाजपेयी

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अपनी आसन्नप्रसवा माँ के लिए

अपनी आसन्नप्रसवा माँ के लिए

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काँच के आसमानी टुकड़े

और उन पर बिछलती सूर्य की करुणा

तुम उन सबको सहेज लेती हो

क्योंकि तुम्हारी अपनी खिड़की के

आठों काँच सुरक्षित हैं

और सूर्य की करूणा

तुम्हारे मुँडेरों भी

रोज बरस जाती है।


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