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Nidhi Pandey

Abstract

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Nidhi Pandey

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आखिर हूँ कौन मैं ?

आखिर हूँ कौन मैं ?

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आखिर हूँ कौन मैं ?

जो कल थी

या जो आज हूँ

वो हूँ मैं ?


अपने ही घर में

अपनों से दूर है जो

या वो जो है ठहाके

लगा रही दोपहर में


घरवालों के साथ

वो हूँ मैं ?

आखिर हूँ कौन मैं ?

जिसकी तस्वीर में संग यार है चार

या वो जो देर रात

जागती है चांद के साथ

वो हूँ मैं ?

आखिर हूँ कौन मैं ?


वो जो जब हँसती है तो उसकी

हँसी देख हस जाने लगते हैं सब

या वो जो जिसने अपने

अश्कों पर पाबंधी लगा रखी है


की पलकों के जरा पहले तक ही

आना उससे आगे नहीं

वो हूँ मैं ?

आखिर हूँ कौन मैं ?


वो जो लड़ रही है अब तक

या जो सहम जाती है बार-बार

वो हूँ मैं ?

आखिर हूँ कौन मैं ?


वो जो रखती है हिसाब

बात बात का

या वो जो जिसे तबाही भी

अब तबाही नहीं लगती

वो हूँ मैं ?

आखिर हूँ कौन मैं ?


जो फिरती है सुकून में

या वो जो अभी भी ढूंढती है

इन सवालों के जवाब

वो हूँ मैं ?

आखिर हूँ कौन मैं ?


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