STORYMIRROR

Vinay Shukla

Others

3  

Vinay Shukla

Others

आईने फुटपाथ पर

आईने फुटपाथ पर

1 min
278

  

दुनिया के सारे दर्द को आपस में बांट कर,

मिलते हैं ज़िन्दगी के आईने फुटपाथ पर।


लड़ती है ज़िन्दगी जहां हर रोज नई जंग,

ख्वाहिशें बिखरी पड़ी हैं सामने फुटपाथ पर।


जुगनुओं से हो रहा रौशन हमारा आशियाँ,

हमको पता है रौशनी के मायने फुटपाथ पर।


आप की ख़ातिर सजी हैं सौ तरह की दावतें,

दो निवाले ला दिए माँ ने यहां फुटपाथ पर।


जब सज रही हो ज़िन्दगी कपड़ों की शक्ल में,

चिथड़े लपेटे सो रही है ज़िन्दगी फुटपाथ पर।


कुछ भी नहीं है पास में, फिर भी सुकून है,

हम को पता है ज़िन्दगी के मायने फुटपाथ पर।


             


                  



Rate this content
Log in