Myself Sambardhana Dikshit. I'm from Odisha. Reading and writing is my hobby.I love to pen down my emotions. "Let's speak through the world of pen and paper."
बेटी विदा होकर भी कहाँ विदा हो पाती है, माँ की हर चिंता में चुपके से लौट आती है। फोन पे बस “मैं ठीक ... बेटी विदा होकर भी कहाँ विदा हो पाती है, माँ की हर चिंता में चुपके से लौट आती है।...
हर पल भागते रहना क्या ज़रूरी है, खुद को भूल जाना क्या मंज़ूरी है? सपनों की दौड़ में खो जाए जो मुस्का... हर पल भागते रहना क्या ज़रूरी है, खुद को भूल जाना क्या मंज़ूरी है? सपनों की दौड़ ...
चेहरों पे है लगाए फिरते मुखौटे छुपा के दर्द सारे बस एक मुस्काने सजाने को। चेहरों पे है लगाए फिरते मुखौटे छुपा के दर्द सारे बस एक मुस्काने सजाने को।
सन तेईस अब बीता गया आज विदाई बेला है। सन तेईस अब बीता गया आज विदाई बेला है।
हमेशा वक़्त की शिकायत मत करो सभी लम्हों को एक ही तराज़ू से न तोलो। हमेशा वक़्त की शिकायत मत करो सभी लम्हों को एक ही तराज़ू से न तोलो।
अधूरे जवाबों के सवालों को दोबारा पूछती नहीं हूं। अधूरे जवाबों के सवालों को दोबारा पूछती नहीं हूं।
नए वर्ष में नई पहल हो कुछ ऐसी आगे हलचल हो। नए वर्ष में नई पहल हो कुछ ऐसी आगे हलचल हो।
महामारी के प्रभाव से भी रुका नहीं महामारी के प्रभाव से भी रुका नहीं
सफ़र कभी मखमल की सेज नहीं बस एक आग का दरिया है। सफ़र कभी मखमल की सेज नहीं बस एक आग का दरिया है।
बचपन की वो कहानी याद आती है वो बातों ही बातों में छिपी बात अब समझ आती है। बचपन की वो कहानी याद आती है वो बातों ही बातों में छिपी बात अब समझ आती है।