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पुष्पों से ढकी हुई कर्ण-धारिका से, कंचन काया शृंगार करती मनोरम।। पुष्पों से ढकी हुई कर्ण-धारिका से, कंचन काया शृंगार करती मनोरम।।
कभी आँसुओं के सैलाब में ना डूबे, उससे तैर कर बाहर स्थान बनाना गुरूर है। कभी आँसुओं के सैलाब में ना डूबे, उससे तैर कर बाहर स्थान बनाना गुरूर है।
खुले आसमान की चिड़िया थी मैं, पंख काट कर दरिंदों ने जमीन पर गिराया है। खुले आसमान की चिड़िया थी मैं, पंख काट कर दरिंदों ने जमीन पर गिराया है।
बाहर की थकावट घर पहुँच दूर होती है, हृदय को शक्ति प्रदान कर सशक्त बनाता है। बाहर की थकावट घर पहुँच दूर होती है, हृदय को शक्ति प्रदान कर सशक्त बनाता है।
खो गई है मोहब्बत कहीं, दिल में आज ग़म ही ग़म भरे हैं, खो गई है मोहब्बत कहीं, दिल में आज ग़म ही ग़म भरे हैं,
अंत में होगी जीत तुम्हारी, उसकी ना चिंता करो, बुलंद हौसलों संग जिंदगी का आकलन किया करो अंत में होगी जीत तुम्हारी, उसकी ना चिंता करो, बुलंद हौसलों संग जिंदगी का आकलन...
मोहताज नहीं है किसके साथ की, अब शब्दों से खुशी ही मिलती है। मोहताज नहीं है किसके साथ की, अब शब्दों से खुशी ही मिलती है।