कुछ लिखा है some writing
ज़ाहिद हैं फिर भी मुझको लुफ़्त परस्त जाने क्यों बता रखे हैं। ज़ाहिद हैं फिर भी मुझको लुफ़्त परस्त जाने क्यों बता रखे हैं।
घी में भुनती, रेत सी महीन सूजी की मर्म चुम्बन करती। घी में भुनती, रेत सी महीन सूजी की मर्म चुम्बन करती।
जिसे तुम फरेपान कहती हो उसमें से आती भीमी भीमी जलने की ख़ुशबू। जिसे तुम फरेपान कहती हो उसमें से आती भीमी भीमी जलने की ख़ुशबू।
चाल तो साबित-क़दम दिखती हैं मेरी मगर दिमाग लड़खड़ाया रहता है. चाल तो साबित-क़दम दिखती हैं मेरी मगर दिमाग लड़खड़ाया रहता है.
एक अजीब सा सपना था वह मगर याद नहीं ज़रा भी । एक अजीब सा सपना था वह मगर याद नहीं ज़रा भी ।
अगर जो ये टूटी तो ये मचलती क़लम, हमारी ज़िदगियों में लहक का सैलाब लाएगी। अगर जो ये टूटी तो ये मचलती क़लम, हमारी ज़िदगियों में लहक का सैलाब लाएगी।
अपनी स्मृति-विषाद की गुनगुनी चाय, सवारियों को उत्साह के साथ परोसता फिरूँगा। अपनी स्मृति-विषाद की गुनगुनी चाय, सवारियों को उत्साह के साथ परोसता फिरूँगा।
पुराने चरमराते तहख़ाने के एक अंधेरे कोने में कुछ किताबें पड़ी हुई हैं। पुराने चरमराते तहख़ाने के एक अंधेरे कोने में कुछ किताबें पड़ी हुई हैं।
तुम्हारे पैरहन के कोने से झूल रही थी अब तजुर्बों की गवाहियाँ सुनते सुनते मैली होचली तुम्हारे पैरहन के कोने से झूल रही थी अब तजुर्बों की गवाहियाँ सुनते सुनते ...
तब चौड़ी छाती फड़केगी पौरुष की वह्नि लहकेगी। तब चौड़ी छाती फड़केगी पौरुष की वह्नि लहकेगी।