Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
"मिजाज बदला है"
"मिजाज बदला है"
★★★★★

© Mohammad Sharif

Others

1 Minutes   7.1K    8


Content Ranking

आज फिर मौसम ने अपना मिजाज़ बदला है,
बादलों ने अपने बरसने का रिवाज़ बदला है।
सूखा शज़र फिर एक बार हरा भरा हो गया,
लगता है कुदरत ने कोई कारसाज़ बदला है।
आख़िर लौट आना था उसे अपने घरौंदे में,
परिन्दे ने आज फिर अपनी परवाज़ बदला है।
उदास सुर भी नगमें प्यार के गुनगुनाने लगे,
सरगम ने जिस वक्त से अपना साज़ बदला है।
घर गरीब के आजकल सब आने जाने लगे,
ख़ुदा ने जब से उसका कामकाज बदला है।
ग़म भी शर्माने लगा आने से रू-ब-रू मेरे "सहर"
जिस दिन से मैंने मुस्कुराने का अंदाज़ बदला है।


सर्वाधिकार सुरक्षित मोहम्मद शरीफ "सहर"

ज़िंदगी गम कुदरत प्यार

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..