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माताजी
माताजी
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© Rajendra Shrivastav

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चली गयीं तुम हमे छोड़,न जाती माताजी

हमको अब भी याद तुम्हारी आती माताजी।

झुकी कमर आँखों पर चश्मा ,मुँह में दाँत नहीं 

अपनी धुन में भजन-कीर्तन गाती मातजी।

रही स्वयं बीमार ,दवा की बात कभी न की,

थका जान कर ,सिर मेरा सहलाती माताजी।

दृष्टि से ओझल होकर भी मुझसे दूर नही

सपनों में आकर अक्सर बतियाती माताजी।

हम कर्तव्य आपके प्रति माँ न निर्वाह सके

सोच-सोच कर अब आँखें भर आती माताजी।

       

#माताजी यादें

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