सुंदरवन और मोंटू गधे की भूल – कहानी
सुंदरवन और मोंटू गधे की भूल – कहानी
सुंदरवन और मोंटू गधे की भूल – कहानी
घने वृक्षों, कलकल बहती नदी और रंग-बिरंगे फूलों से सजा एक सुंदर जंगल था—सुंदरवन। नाम के अनुरूप ही उसका वातावरण भी अत्यंत सुंदर और शांत था। यहाँ शेर, हिरण, हाथी, खरगोश, बंदर, मोर—सभी जानवर आपस में प्रेम और सहयोग से रहते थे। किसी को किसी से डर नहीं था, न ही कोई बड़ा–छोटा। सब मिल-जुलकर जंगल के नियमों का पालन करते और सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करते थे।
सुंदरवन में हर प्राणी की अपनी भूमिका थी। शेर राजा था, लेकिन कभी अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं करता। हाथी सुरक्षा का ध्यान रखते, बंदर संदेशवाहक थे और हिरण शांति का प्रतीक। इन्हीं सबके बीच रहता था मोंटू गधा।
मोंटू मेहनती था। दिन-रात लकड़ियाँ ढोता, पानी लाने में मदद करता और ज़रूरत पड़ने पर किसी भी काम से पीछे नहीं हटता। लेकिन उसके बावजूद कई जानवर उसे हल्के में लेते।
“अरे मोंटू, तुमसे तो बस बोझ ही उठवाया जा सकता है,”
“गधे का दिमाग़ और उसकी अक़्ल!”
ऐसी झिड़कियाँ उसे अक्सर सुननी पड़तीं।
शुरू में मोंटू हँसकर टाल देता, लेकिन धीरे-धीरे ये बातें उसके मन में चुभने लगीं। उसे लगने लगा कि उसकी मेहनत का कोई सम्मान नहीं है। वह स्वयं से प्रश्न करने लगा—
“क्या मैं सच में इतना ही बेकार हूँ?”
एक दिन सुंदरवन की सीमा पर हलचल हुई। दूसरे जंगल—कठोरवन—के कुछ जीव सुंदरवन में आ पहुँचे। वे शोरगुल करने वाले, अनुशासनहीन और स्वार्थी थे। वे पेड़ों को बिना कारण काटते, नदी का पानी गंदा करते और आपस में झगड़ा करते।
सुंदरवन के जानवरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थे।
मोंटू यह सब देख रहा था। कठोरवन के जीवों ने उससे बात की। उन्होंने मोंटू की पीड़ा को भाँप लिया।
“तुम्हें यहाँ कोई सम्मान नहीं देता,”
“हम तुम्हें तुम्हारी असली क़ीमत दिखाएँगे,”
उनकी बातों ने मोंटू के मन में दबा हुआ आक्रोश जगा दिया।
अपनी झिड़कियों को अपमान समझकर मोंटू ने उन्हें अपना सम्मान का विषय बना लिया। उसे लगा कि सुंदरवन के जानवरों को सबक सिखाना ज़रूरी है।
उसने कठोरवन के जीवों की मदद करनी शुरू कर दी।
कभी उन्हें जंगल के गुप्त रास्ते बताता,
कभी जलस्रोतों तक पहुँचने में सहायता करता।
धीरे-धीरे सुंदरवन का शांत वातावरण बिगड़ने लगा।
नदी का पानी गंदा हो गया,
जानवरों में आपसी विश्वास टूटने लगा।
एक रात मोंटू ने देखा कि एक नन्हा हिरण गंदे पानी से बीमार पड़ गया है। उसकी माँ रो रही थी। उस दृश्य ने मोंटू के हृदय को झकझोर दिया।
उसे पहली बार एहसास हुआ—
“मैं अपने अपमान का बदला लेते-लेते पूरे सुंदरवन को सज़ा दे रहा हूँ।”
उसकी अंतरात्मा उसे धिक्कारने लगी।
अगले दिन मोंटू ने साहस जुटाया और शेर राजा के सामने जाकर सब सच बता दिया। कठोरवन के जीवों की चाल और अपनी भूल स्वीकार की।
शेर ने कठोर स्वर में कहा,
“गलती सबसे होती है, लेकिन उसे स्वीकार करना साहस का काम है।”
मोंटू की मदद से सुंदरवन के जानवरों ने एकजुट होकर कठोरवन के जीवों को समझाया और जंगल से बाहर भेज दिया।
सभा बुलाई गई। सब जानवर एकत्र हुए। मोंटू की आँखों में आँसू थे।
“मैंने अपने अपमान को अहंकार बना लिया,”
“मेरी वजह से सुंदरवन को कष्ट पहुँचा,”
“कृपया मुझे क्षमा कर दीजिए।”
कुछ पल का सन्नाटा छा गया। फिर हिरण आगे बढ़ा और बोला—
“गलती मान लेना ही सबसे बड़ी समझदारी है।”
सभी जानवरों ने मोंटू को क्षमा कर दिया।
उस दिन के बाद सुंदरवन फिर से शांत हो गया।
अब कोई मोंटू को ताना नहीं देता था।
और मोंटू ने भी सीख लिया था कि सम्मान दूसरों से नहीं, अपने कर्मों से मिलता है।
अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम"
