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Dinesh Dubey

Children Stories

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Dinesh Dubey

Children Stories

सफलता

सफलता

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दिल्ली शहर से एक आठ साल का लड़का रमन गर्मी की छुट्टियों में अपने माता पिता के साथ अपने दादा जी के पास गाँव घूमने गया।

एक दिन वो बहुत खुश था, उछलते-कूदते वो दादाजी के पास पहुंचा और बड़े गर्व से बोला, ” जब मैं बड़ा होऊंगा तब मैं बहुत सफल आदमी बनूँगा। दादा जी क्या आप मुझे सफल होने के कुछ टिप्स दे सकते है ?

उसके दादा जी ने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया, और बिना कुछ कहे रमन का हाथ पकड़ा और उसे करीब की एक नर्सरी में ले गए।

वहां पहुंचकर दादा जी ने दो छोटे-छोटे पौधे खरीदे और घर वापस आ गए।

नर्सरी से लौट कर दादा जी ने एक पौधा घर के बाहर के बाग में लगा दिया, और एक पौधा गमले में लगा कर घर के अन्दर रख दिया !

दादा जी ने रमन से कहा “क्या लगता है तुम्हे, इन दोनों पौधों में से फ्यूचर में कौन सा पौधा अधिक सफल होगा?”

रमन कुछ क्षणों तक सोचता रहा और फिर बोला, ”मुझे लगता है, घर के अन्दर वाला पौधा ज्यादा सफल होगा ,क्योंकि वो हर एक खतरे से सुरक्षित है, जबकि घर के बाहर वाले पौधे को तेज धूप, आंधी-पानी, और जानवरों से भी खतरा है।

उसकी बात सुन दादाजी बोले, ”*चलो देखते हैं आगे क्या होता है !”, 

उसके बाद दादा जी अखबार उठा कर पढने लगे‼

कुछ दिन बाद छुट्टियाँ ख़तम हो गयीं और रमन अपने माता पिता के साथ वापस शहर चला गया।

रमन के जाने के बाद उसके दादाजी दोनों पौधों पर बराबर ध्यान देते रहे और समय बीतता गया। 6-7 साल बाद एक बार फिर वो अपने पेरेंट्स के साथ गाँव घूमने आया और अपने दादा जी को देखते ही बोला, “दादा जी, पिछली बार मैं आपसे सफल होने के कुछ टिप्स मांगे थे पर आपने तो कुछ बताया ही नहीं…पर इस बार आपको ज़रूर कुछ बताना होगा‼”

रमन की बात सुन दादा जी मुस्कुराये और रमन को उस जगह ले गए जहाँ उन्होंने गमले में पौधा लगाया था।

वह पौधा अब एक खूबसूरत पेड़ में परिवर्तित हो चुका था।

रमन यह देख खुश होकर बोला, ” देखा दादाजी मैंने कहा था न कि ये वाला पौधा ज्यादा सफल होगा,,"!

दादा जी मुस्कराकर "“अरे, पहले बाहर वाले पौधे का हाल भी तो देख लो…”, और ये कहते हुए दादाजी लड़के को बाहर ले गए,।

घर के बाहर बाग में एक विशाल वृक्ष गर्व से खड़ा था! उसकी शाखाएं दूर तक फैलीं थीं और उसकी छाँव में खड़े पथिक आराम से बातें कर रहे थे।

दादा जी ने रमन से पूछा“अब बताओ कौन सा पौधा ज्यादा सफल हुआ?”,

रमन आश्चर्य से देखते हुए कहता है *"दादा जी ये ब..ब…बाहर वाला!….लेकिन ये कैसे संभव है, बाहर तो उसे न जाने कितने खतरों का सामना करना पड़ा होगा….फिर भी ,,,ये उतना बड़ा हो गया।

रमन की बात सुन दादा जी मुस्कुराए और बोले, “हाँ, लेकिन चैलेंजेस का सामना करने के अपने रिवार्ड (इनाम) भी तो हैं, बाहर वाले पेड़ के पास आज़ादी थी कि वो अपनी जड़े जितनी चाहे उतनी फैला ले, अपनी शाखाओं से आसमान को छू ले…यही सफलता का रहस्य है बेटे, इस बात को याद रखो और तुम जो भी करोगे उसमे सफल होगे- अगर तुम जीवन भर सुरक्षित रास्ता पसंद करते हो तो तुम कभी भी उतनी उन्नति नहीं कर पाओगे जितनी तुम्हारी क्षमता है, लेकिन अगर तुम तमाम खतरों के बावजूद इस दुनिया का सामना करने के लिए तैयार रहते हो तो तुम्हारे लिए कोई भी लक्ष्य हासिल करना असम्भव नहीं है।

रमन ने लम्बी सांस ली और उस विशाल वृक्ष की तरफ देखने लगा…वो दादा जी की बात समझ चुका था, आज उसे सफलता का एक बहुत बड़ा सबक मिल चुका था।

डर डर कर हर समय सुरक्षा के चक्कर में मत पड़े रहिये…हिम्मत करिए जोखिम लीजिये और उस विशाल वृक्ष की तरह अपनी जीवन को बड़ा बनाइये।


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