Er Saurabh Pandey

Others


1.7  

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कोरोना के समय

कोरोना के समय

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 कोरोना जैसे वायरस का कहर आज पूरा विश्व खेल रहा हैl इस वायरस के बचाव के लिए हमें अपने अपने घरों पर बैठना पड़ रहा हैl हम ने कभी सोचा नहीं होगा इस कहर का भी सामना करना पड़ जाएगा अपने अपने घरों पर बैठना किसी चुनौती से कम नहीं है लेकिन हम अपने इस चुनौती का सामना करें और घरों पर बैठे रहे इसके साथ-साथ अपना धैर्य न खोएl इस संघर्ष की घड़ी में रोज की दिनचर्या में बदलाव जरूर करें पहले कैसे हम रहते थे अब हमें कैसे रहना है किसी काम को करने के लिए उसको एक समय निर्धारित करें क्योंकि हमें अपना काम घर पर ही रहकर करना है समय का पूर्ण उपयोग करें यह सोचे ना कि हम से नहीं होगा अगर आपने इतना सोच किया तो आप अपने घर को खो रहे हैंl यह सोच के काम ना करें बिना बाहर जाए हमारा काम नहीं होगाl अगर यह सोचकर आप काम करेंगे तो आपको रोना जैसे वायरस को दावत दे रहे हैं ऐसा में ना करके अपने आप को धैर्यवान बनाना है अपने अंदर विश्वास जागृत करके कि हमसे काम घर बैठे कर सकते हैं; आज प्राकृतिक ने मौका दिया है कि हम घर बैठे अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं। समय न मिलने के कारण जो काम हमसे नहीं होता था उसे हम घर बैठे कर सकते हैं क्योंकि आज उसके लिए हमारे पास भरपूर समय है। मेरा मानना है कि आज सभी में कुछ ना कुछ गुण होता है चाहै किसी को पढ़ने अच्छा लगता है और लिखने का; गाने का ;नाचने का इत्यादि जैसे गुणों से भारत आज हर क्षेत्र में भरा पड़ा हैl आज समय आया है कि घर बैठे गुणों को निखार सकते हैं और अपने समय को उचित दिशा दे सकते हैं मानसिक तनाव से ग्रसित ना हो इसलिए घर पर बैठे कुछ न कुछ अपनी रुचि के कार्यों को करते रहे और अपने अंदर छिपी प्रबल इच्छा शक्ति को जागृत करते रहें यही समय है जिसमें हम अपने माता-पिता परिवार के हर सदस्य से मुलाकात करते रहें उनसे उनकी जिंदगी की बातों को पूछे अपनी बातों को बताएं अपने बड़ों से कुछ सीखें कुछ नया करने के बारे में सोचें क्योंकि ऐसा समय जल्दी नहीं आने वाला जिसमें हम अपने परिवार एक साथ हैं; आज के युवा वर्ग को मैं यही बताना चाहता हूं कि परिवार के सभी बुजुर्ग सदस्य एवं आपके सदस्य हम जैसे युवाओं पर ही निर्भर हैं उनकी खुशी में ही हमारी खुशी है; एक दूसरे का साथ ही एक मजबूत कड़ी का निर्माण करता है एक समय ऐसा भी आएगा जब हम फिर बाहर आएंगे बाहर की रौनक को हम फिर से देखेंगे; गांव की गलियों को हम फिर से दौड़ लगाएंगे परंतु को रोना के इस घड़ी में हमें एक दूसरे की मुस्कान सुख दुख में साथ देना पड़ेगा कामयाबी तभी मिलेगी जब हम किसी मुश्किलों का सामना एक चुनौती लेकर कार्य करेंगे और अपने विश्वास और धैर्य को डगमगाने और नहीं देंगेl क्योंकि समय चक्र फिर बदलेगा पूना हम उसी उसी स्थिति में आएंगे जिस स्थिति में पहले थेl सरकार द्वारा बताए गए हर कदम का पालन पूरे निष्ठावान से करें और आगे आने वाले समय हमें और आगे क्या करना है इसकी रणनीति बनाते रहे सोचते रहे विचार करते रहे मंथन करते रहे जब तक हम किसी क्षेत्र में मंथन नहीं करेंगे तब तक हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं बस हमें यह ध्यान देना चाहिए कि हम इस संकट की घड़ी में हम दूसरों के लिए क्या कर सकते हैं आज के युवा वर्ग ही सोच बनाए रखें हमसे जो हो सकेगा हम करेंगे अंतिम लाइन से अपने विचारों को समाप्त करते हो मैं यही कहना चाहता हूं कि भारत लड़ेगा भारत जीतेगा जय हिंद!


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