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ज़िंदगी...

“ ज़िंदगी तुझको नहीं है उस्तवारी हाय-हाय मौत का मातम हुआ है ग़मगुसारी हाय-हाय रात सरहद पर चली थी गोलियाँ फिर दोस्तो आ पड़ा है देश पर फिर वक़्त भारी हाय-हाय —महावीर उत्तरांचली ”

By Mahavir Uttranchali
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