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यूं ही रोज...

यूं ही रोज चलते चलते , जिंदगी से मुलाकात हो जाती है, कहती है चलो साथ साथ चलते हैं, हँस कर टाल देता हूं कि, बेवफा से वफा की चाह कैसे कर सकता हूं।

By Sanju Srivastava
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