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यूं ही...
यूं ही रोज चलते...
यूं ही रोज...
“
यूं ही रोज चलते चलते ,
जिंदगी से मुलाकात हो जाती है,
कहती है चलो साथ साथ चलते हैं,
हँस कर टाल देता हूं कि,
बेवफा से वफा की चाह
कैसे कर सकता हूं।
”
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