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वो हसी कहाँ...

वो हसी कहाँ गवा दी हो, जो अक्सर लबों पे झलकती थी वो आंसू कहाँ छुपा दी हो, जो अक्सर बेवजा ही तु बहाती थी।

By SusriSwagatika Mohapatra
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