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उन बंदिशों...

उन बंदिशों से निकलना चाहा , पर ज़िम्मेदारियों के बेड़ियों ने जकड़ लिया , जहां धूप न पहुँचे वहां हौसले की रौशनी ने भरोसा दे दिया , ख़्वाब देखा करते हैं , वो नन्हें आँखे जिनको पता है उड़ना आसान नहीं हैं , पर पंख न होते हुऐ भी लड़खड़ा कर उड़ना भी सीख लिया ।

By Disha Singh
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