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तुम्हारी...

तुम्हारी याद जब गुजरती है हद से , थोड़ा मुस्कुरा लेता हुँ और उठने वाले सारे दर्द मेरे दिल के, सीने में दबा लेता हुँ देता हुँ सख्त हिदायत ईन आँखों को रोक लो सैलाब सारे कुछ ईस तरह से दिलबर दिल के सारे दर्द छुपा लेता हुँ। रमाशंकर

By Ramashankar Yadav
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