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समेट लेतें...

“ समेट लेतें हैं वो हर दर्द को ... ऑसुओं का बोझ ढोते नहीं, हॉ सच है लड़के रोते नहीं । दर्द तो उन्हें भी बेहिसाब होता है , पर ऑसुओं को छुपाने का हुनर उनके पास होता है । घुट कर सह लेतें हैं सब आह भी करते नहीं , हॉ सच है लड़के रोते नहीं ।।S.S. ”

By Sarita Saini
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