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पल भर की...

पल भर की तसल्ली को लोग साथ बताते हैं, जीवन भर के गम में साथ छुड़ा जाते हैं, आखिर फिर क्यो मोह ही घेरे संसार खड़ा है, जन्मों के रिश्ते कहाँ इन्सान निभाते हैं।।

By Sushmita Singh
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