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मुझे समेट...

मुझे समेट लो अपनी बाँहों में मैं इक सदी से बिखरा पड़ा हूँ मुझे भी चमका दो शहर जैसे मैं गांव मानिंद उजड़ा पड़ा हूँ सलिल सरोज

By Salil Saroj
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