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मजबूरियों...

मजबूरियों का उठा कर फ़ायदा खूबसूरती पर क्यों हो रहे फ़िदा प्यार को।प्यार ही ना रहने दिया दिल तोड़कर बड़ा जुर्म जो किया सज़ा तुम्हारी हमसे होना है जुदा

By Shagufta Quazi
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