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माना कि...

माना कि कमीं है मुझमें, पर कमजोर नही हूँ, गर्दिश में हैं सितारे अभी, पर मजबूर नही हूँ, कुछ पल ठहर तो जाओ, वाकिफ नही हो मुझसे, हारता हूँ अपनें क़ज़ा से, पर हमेशा ये दस्तूर नही है... *क़ज़ा - भाग्य

By Ravindra Shrivastava Deepak
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