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कहते हैं...

कहते हैं मुझमे अब वो बात नहीं चोट दिल की है या हालातों की, मालूम नही । जलवे अब वो न रहे जो दास्तानों में कैद है अफ़साने अंजाम हुए कबके और तारीखे मालूम नही । @Vikas kumar mishra

By VIKAS KUMAR MISHRA
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