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खिड़की...

खिड़की किनारे बैठे , आसमान में देखा खूबसूरत चांद ढलती गयी शाम और चढ़ता गया जाम और हम अपनी कलम से लिखते रहे उनका नाम । - सुहास घोके

By SUHAS GHOKE
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