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ख़्वाहिशों...

ख़्वाहिशों के समन्दर में मिलते हैं , ज्यों चाहतों के दरिया। काश ! यूँ ही... मिल जाये इक दिन, तेरा-मेरा नज़रिया। पास रहकर भी कितने हम दूर हो गए हैं, कुछ इस कदर हम ख़ुद ही में, यूँ मशगूल हो गए हैं।

By Jyoti Agnihotri
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