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ख़्वाबीदा...

ख़्वाबीदा सा ये जहाँ सारा, बदस्तू चलता ही रहा काफिला, मुसलसल चलती रही ये आंधी, मैं मुख्तसर डटा रहा, वो इक आशा का दिया लिए सारा।

By kamal Bohara
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