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कभी उन...

कभी उन गलियों मे भी गुजरीएगा कभी उन राहों पर फिर चलीएगा मेरा दावा है आपसे कुछ पुराने दोस्त फिर मिलेंगे मुस्कान, अश्क के हाथ थामे आएगें तब पता चले कही जाके कितना कमाया कितना गवाया पर असली दौलत तो कबके लुटा चुके वो भी क्या दिन थे बचपन के।। rm

By Paramita Mishra
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