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ज़िन्दगी से...

ज़िन्दगी से त्तालुकात मेरा अब रहा नहीं, इन लम्हों से त्तालुकात मेरा अब रहा नहीं, छोड़ दिया है मैंने अब इन राहों पर गुजरना तेरे वास्ते, क्यूंकि मेरा दिल धड़कता है केवल तुम्हारे ही वास्ते।

By Shubham Jain
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