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जब मौत का...

“ जब मौत का दिन मुकर्रर होगा ऐ खुदा, सिर्फ एक और दिन की मोहलत देना. इक दिन बस जीने के लिए चाहिए जहाँ कोई ख्वाहिश न बेबसी हो, कुछ हो तो बस सुकून अपनों की मुहब्बत का और एक मीठी सा एहसास कि जो चाहा वो मिला नहीं पर बिन माँगे सब मिल गया. ”

By Pragya Gaur
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