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इस दुनिया...

इस दुनिया में सबकी अलग-अलग हैं चाहतें, मंज़िल तक पहुंचने के अलग-अलग हैं रास्ते ! बन सको तो बनो रहनुमा किसी और के वास्ते, फ़रिश्ते बन कर मजलूमों को पहुंचाओ राहते!

By SHIVENDRA KISHORE
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