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हवाएं...

हवाएं दुरुस्त हुई ही थी कि ... उनमें नफरत का जहर घुल गया, कॅरोना का कहर कम था जो.. इंसानियत का लबादा उड़ गया... @ मनीष शुक्ल

By manish shukla
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