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दरबान तो...

“ दरबान तो में उस वक्त का बन बेठा था।। जो मौसम की तरह अपने रंग बदल रहा था।। मुझे क्या पता था की जिस , वक्त ए दरबार का में दरबान बन बेटा था।। वो वक्त ए दरबार ही मेरे यार क था।। ”

By Harish Pawar
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