STORYMIRROR
ढलते...
ढलते हुए सुराज...
ढलते हुए...
“
ढलते हुए सुराज को देख कर बैचेनी सी होती हे। ऐसा लगत है तूम दुर जा रह हो। फ़िर उस आसमन को देखकर सोचती हूँ, 'जोओगे नही ते दुबारा वापस केसै आओगे?'
”
126
More hindi quote from Sanjana Rajpal
Similar hindi quote from Abstract
Download StoryMirror App