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छोटा सा...

छोटा सा परिवार है सुख दुःख का का संसार है मेल-जोल से रहते सारे सबमें ढेरों प्यार है। खुशियों की बौछार है मीठी सी तकरार है। रौनक ऐसी ही रहती है जैसे तीज त्यौहार है। रिपुदमन झा "पिनाकी" धनबाद (झारखण्ड) स्वरचित

By रिपुदमन झा "पिनाकी"
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