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शिकायत हो...
“
शिकायत हो अगर मुझसे शिकायत खुलके तुम कर लो। दुखाया हो जो दिल तेरा बग़ावत खुलके तुम कर लो। मगर चुपचाप मत बैठो न दिल पर बोझ तुम रक्खो- मुहोब्बत खुलके तुम कर लो या नफरत खुलके तुम कर लो। रिपुदमन झा "पिनाकी" धनबाद (झारखण्ड) स्वरचित एवं मौलिक
”
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रिपुदमन झा "पिनाकी"
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