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चाहती थी...
चाहती थी...
चाहती...
“
चाहती थी
इतनी मुहब्बत हो तुझसे
की मुक्त हो जाऊं शरीर से
तब भी
तेरे रूह से गहरा नाता हो
की पहचान लूँ तुझे
हर रूप में
छाँव में धूप में
शालिनीपंकज
”
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