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चादरों से...

चादरों से निकल चांद कि खोज में हौसलों बलवान उम्मीदें ओज में मन में धधकती मेहनत की गर्मी ख़्वाब है या कोई ख्वाहिश है रोज में।

By Utkarsh Srivastava
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