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बहा रहे जो...

बहा रहे जो उल्टी गंगा, पा रहे वो बधाई भी कुछ दे नहीं रहे जहाँ को और मिटा रहे खुदाई भी बागवां है बाग के जो, वो लुटा रहे अमराई भी तारीख में नाम लिख, शरमा रहीं रोशनाई भी... #संजयशेष

By Sanjay Pathade Shesh
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