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ऐसा नहीं...

ऐसा नहीं है, के हमेशा से तन्हा थे हम, कुछ रोज़, मोहब्बत भी मिली थी हमें, पर तनहाई इस हद तक शुमार थी रगो में हमारे, के उसे निभाने का तब सलीखा ना आया हमें, जब निभाने का सलीख सीख लिया हमने, तो फिर कभी वो मोहब्बत ना मिली हमें,

By Mohit Kothari
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