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आंसुओं का...

आंसुओं का उसके ख़र्चा बढ़ गया है, यादों में जैसे ज़हर सा घुल गया है, दिल उसका बेआबरू सा हो गया है, जब से वो शहर छोड़ कर गया है।

By Nigar Yusuf
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