STORYMIRROR

आ प्रियतम...

आ प्रियतम हृदय के पट खोल दूँ मैं अब आ प्रियतम प्रीत के तट सब तोड़ दूँ मैं अब ... मिलन का अवसर है आया .. मन पर वसंत है छाया ...प्रपोज डे है आया ...

By Manoj Kumar Samariya “Manu"
 176