शायद हम अपने पुरखों की विरासत भूल चुके है, इसलिए शत्रु पड़ोसी भी हमें आंख दिखाते हैं. शायद हम अपने पुरखों की विरासत भूल चुके है, इसलिए शत्रु पड़ोसी भी हमें आंख दिख...
बस इन्हीं खबरों से बनता है आजकल अख़बार। बस इन्हीं खबरों से बनता है आजकल अख़बार।