आज कब से मैं घंटों यहां टकटकी लगाए खड़ी हूंँ, कब खिड़की खुले और मैं फिरकी बन कर उड आज कब से मैं घंटों यहां टकटकी लगाए खड़ी हूंँ, कब खिड़की खुले और मैं फिरकी ...